बिलकिस बानो की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज: पिछली तारीख में कोर्ट ने पूछा था- क्या दोषियों को माफी मांगने का मौलिक अधिकार है?

नई दिल्ली2 घंटे पहले

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2002 में गुजरात के गोधरा कांड के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के समय बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप हुआ था। उनके परिवार के 17 सदस्यों में से 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी। - Dainik Bhaskar

2002 में गुजरात के गोधरा कांड के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के समय बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप हुआ था। उनके परिवार के 17 सदस्यों में से 7 लोगों की हत्या कर दी गई थी।

बिलकिस बानो केस में 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा। इस मामले की सुनवाई जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और उज्जल भुइयां कर रहे हैं।

इसके पहले 20 सितंबर को कोर्ट ने 11 दोषियों की तरफ से मौजूद वकील से कई सवाल किए थे। कोर्ट ने पूछा था कि क्या दोषियों को माफी मांगने का मौलिक अधिकार है? इस पर वकील ने स्वीकार किया था कि माफी मांगना दोषियों का मौलिक अधिकार नहीं है।

3 मार्च 2002 को बिलकिस बानों के साथ गैंगरेप हुआ था। तब वो पांच महीने की प्रेग्नेंट थीं।

3 मार्च 2002 को बिलकिस बानों के साथ गैंगरेप हुआ था। तब वो पांच महीने की प्रेग्नेंट थीं।

अगस्त से अब तक हुई सुनवाई

24 जुलाई की सुनवाई: जुलाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम अंतिम सुनवाई के लिए 7 अगस्त की तारीख तय कर रहे हैं। तब तक सभी पक्ष अपने जवाब, लिखित दलीलें कोर्ट में सब्मिट करें। सभी पक्ष ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।

7 अगस्त की सुनवाई : बिलकिस की तरफ से पेश एडवोकेट शोभा गुप्ता ने बताया कि इस केस के दोषी मुसलमान के खून के प्यासे थे। वो बस उसे मारना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कई दिनों तक उसके परिवार का पीछा भी किया था।

8 अगस्त की सुनवाई : आरोपियों की तरफ से पेश एक वकील ने कोर्ट में कहा था- जब पीड़ित मौजूद है तब दूसरों के पास याचिका का अधिकार नहीं है। दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने लोकस स्टैंडी के तहत PIL पर सुनवाई का निर्देश दिया।

17 अगस्त की सुनवाई : जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि रिहाई में छूट का फायदा सिर्फ बिलकिस के दोषियों को ही क्यों दिया गया, बाकी कैदियों को ऐसी छूट क्यों नहीं मिली। अदालत ने यह भी पूछा कि जब गोधरा की कोर्ट ने ट्रायल नहीं किया, तो उससे राय क्यों मांगी?

24 अगस्त की सुनवाई: एक दोषी के वकील ने बताया कि उनका क्लाइंट सजा काट चुका है और रिहाई के बाद से वकालत कर रहा है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने हैरानी जताते हुए पूछा- ये कैसे हुआ? क्या कोई सजायाफ्ता प्रैक्टिस कर सकता है? तब वकील ने कहा कि दोषी अपनी सजा काट चुका है। हालांकि, कोर्ट ने कहा कि दोषी तो वह अब भी है। उसकी रिहाई सजा पूरी होने से पहले हुई है।

14 सितंबर की सुनवाई: जस्टिस लूथरन ने कहा कि इस मामले में केवल दोषियों की रिहाई पर बात हो, मामले की क्रूरता पर नहीं। उन्होंने कहा कि दोषियों को अपराध को लेकर सजा पहले ही दी चुकी है।

30 अगस्त की सुनवाई: कोर्ट ने मुंबई की ट्रायल कोर्ट में जुर्माना भरने पर एक दोषी को फटकार लगाई थी। अदालत ने कहा था कि आपने कोर्ट की अनुमति के बिना जुर्माना क्यों भरा? लूथरा ने कहा कि जुर्माना जमा करने को रिहाई में राहत से जोड़कर न देखा जाए। इसका रिहाई पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उनका इरादा सुप्रीम कोर्ट के अधिकार को कम करने या झुकाने का कोई इरादा नहीं था।

गुजरात दंगे में बिलकिस का गैंगरेप हुआ, परिवार के 7 लोगों की हत्या भी कर दी
2002 में गोधरा ट्रेन जलाने की घटना के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के डर से भागते समय उनके साथ गैंगरेप किया गया था। तब बिलकिस बानो की उम्र 21 साल थीं। वे पांच महीने की प्रेग्नेंट भी थीं।

दंगाइयों ने बिलकिस की मां समेत चार और महिलाओं का भी रेप किया। इस दौरान हमलावरों ने बिलकिस के परिवार के 17 सदस्यों में से 7 लोगों की हत्या कर दी। इनमें बिलकिस की तीन साल की एक बेटी भी थी। वहीं, 6 लोग लापता हो गए, जो कभी नहीं मिले।

हमले में सिर्फ बिलकिस, एक शख्स और तीन साल का बच्चा ही बचे थे। इस मामले में 11 लोगों को दोषी ठहराया गया था। 15 अगस्त 2022 को गुजरात सरकार ने सभी दोषियों को जेल से रिहा कर दिया था।

बिलकिस ने दाखिल की थीं दो याचिकाएं
बिलकिस ने इसके खिलाफ 30 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं लगाई थी। पहली याचिका में 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देते हुए उन्हें तुरंत वापस जेल भेजने की मांग की थी। वहीं, दूसरी याचिका में कोर्ट के मई में दिए आदेश पर फिर से विचार करने की मांग की थी, जिसमें कोर्ट ने कहा था कि दोषियों की रिहाई पर फैसला गुजरात सरकार करेगी। इस पर बिलकिस ने कहा कि जब केस का ट्रायल महाराष्ट्र में चला था, फिर गुजरात सरकार फैसला कैसे ले सकती है?

इसके अलावा सामाजिक कार्यकर्ता सुभाषिनी अली और TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने मामले के 11 दोषियों को रिहा करने के गुजरात सरकार के आदेश को रद्द करने की मांग की थी।

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सुप्रीम कोर्ट में 7 अगस्त को सुनवाई के दौरान जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्ज्वल भुइयां की बेंच को बिलकिस की एडवोकेट शोभा गुप्ता ने बताया कि इस केस के दोषी मुसलमान के खून के प्यासे थे। वो बस उसे मारना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने कई दिनों तक उसके परिवार का पीछा भी किया था। उन्होंने कोर्ट में कहा कि सभी दोषी उसके घर के आस-पास ही रहते थे। वो उन्हें जानती थी। पढ़ें पूरी खबर…

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पति याकूब रसूल के साथ बिलकिस बानो।

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बिलकिस बानो गैंगरेप केस में सुनवाई के दौरान एक दोषी कोर्ट नहीं पहुंचा था। उसके वकील ने सुनवाई शुरू होते ही अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को अभी तक कोर्ट का औपचारिक नोटिस नहीं मिला है, क्योंकि वह घर पर नहीं है। इस पर कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता एक बार फिर दोषी को नोटिस सर्व करने की कोशिश करें। अगर फिर भी दोषी को नोटिस न दिया जा सके, तो नोटिस एक अंग्रेजी और एक गुजराती अखबार में छपवा दिया जाए। पढ़ें पूरी खबर…

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