ब्रजेश पाठक के क्षेत्र में ही फ्लॉप है आयुष्मान योजना: स्वास्थ्य मंत्री के शहर में 10 प्राइवेट हॉस्पिटल, लेकिन किसी में भी नहीं मिलता मुफ्त इलाज

एक घंटा पहलेलेखक: रक्षा सिंह

23 सितंबर, 2022 यानी शनिवार को सीएम योगी आदित्यनाथ यूपी में आयुष्मान भारत को उत्सव की तरह मना रहे हैं। इस योजना के आज 4 साल पूरे हुए हैं। दिवस की टैग लाइन है “चार वर्ष आयुष्मान, स्वास्थ्य अमृत जान सम्मान।” सीएम योगी का कहना है कि यह योजना यूपी को स्वस्थ बनाने में मदद कर रही है। इसलिए आज के दिन इसका अच्छे से प्रचार-प्रसार करना जरूरी है। साथ ही योजना के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जाएगा।

दैनिक भास्कर की टीम यूपी में आयुष्मान भारत की जमीनी हकीकत जानने स्वास्थ्य मंत्री और डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के क्षेत्र मल्लावां पहुंची। लोगों से बात की। उन्होंने जो बताया आइए जानते हैं।

कार्ड तो बने, पर उसका फायदा नहीं मिलता
लखनऊ से मात्र 96 किलोमीटर दूर है मल्लावां। ये यूपी ब्रजेश पाठक का गृह क्षेत्र है। यहां की सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से मिले आंकड़े बताते हैं कि क्षेत्र में आयुष्मान की कैटेगरी में 5340 परिवार आते हैं। इनमें से 20 सितंबर, 2022 तक 4718 परिवार के कार्ड बन चुके हैं। 622 के अब भी बनना बाकी हैं। ये सभी आंकड़े CHC को ब्लॉक से मिले हैं। अब इन आंकड़ों को देखकर तीन सवाल खड़े होते हैं।

पहला- क्या ये आंकड़े सही हैं?
दूसरा- क्या इस कार्ड का लाभ लोगों को मिल पा रहा है?
तीसरा- सरकारी अस्पतालों में इलाज पहले ही फ्री था तो कार्ड की क्या जरूरत?

  • चलिए तीनों सवालों पर एक-एक करके चलते हैं…

जिनका कार्ड नहीं बना, उनको भी आंकड़ों में दिखा दिया जाता है

तस्वीर में शकील खान हैं। हार्ट के मरीज हैं। गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। कई बार आयुष्मान कार्ड बनवाने गए पर बन नहीं पाया।

तस्वीर में शकील खान हैं। हार्ट के मरीज हैं। गरीबी रेखा से नीचे आते हैं। कई बार आयुष्मान कार्ड बनवाने गए पर बन नहीं पाया।

क्या ये आंकड़े सही हैं? यह सवाल पूछने पर CHC में मौजूद एक कर्मचारी नाम न बताने की शर्त पर ही सही हमसे कहते हैं कि काफी बार इन आंकड़ों में बहुत गड़बड़ी होती है। कई ऐसे गांव हैं, जहां 2-3 आयुष्मान कार्ड ही बने हैं। लेकिन आंकड़ों में दिखाने के लिए नंबर बढ़ा कर बता दिए जाते हैं।

उन्होंने बताया कि आयुष्मान कार्ड लाभार्थी जब कार्ड बनवाने आते हैं, तो उनकी डिटेल्स लिख ली जाती हैं। ऐसे में नंबर तो बढ़ जाते हैं, लेकिन जितने लोगों की डिटेल्स लिखी हैं उन्हें कार्ड बनाकर नहीं दिया जाता। कभी अंगूठा मैच न होने की वजह से कभी कुछ बहाना बनाकर लोगों को वापस भेज दिया जाता है।

मल्लावां में राघवपुर गांव के निवासी शकील खान ने बताया कि वो आयुष्मान कार्ड बनवाने के लिए 3 बार कोशिश कर चुके हैं। लेकिन हर बार लिस्ट में नाम ना होने का बहाना देकर उन्हें लौटा दिया जाता है। वो कहते हैं, “मैं खुद हार्ट का मरीज हूं, साथ ही परिवार में कोई बीमार पड़ जाता है तो 4-5 हजार रुपए जमा करना भी मुश्किल हो जाता है। इसलिए आयुष्मान कार्ड की जरूरत है, लेकिन यहां कोई बना नहीं रहा।”

30% लोगों को इस कार्ड से फायदा मिल पाया

तस्वीर में देवेंद्र तिवारी हैं। पत्नी के ऑपरेशन के लिए इन्होंने आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल किया था। पूरा इलाज इन्हें मुफ्त में मिल गया।

तस्वीर में देवेंद्र तिवारी हैं। पत्नी के ऑपरेशन के लिए इन्होंने आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल किया था। पूरा इलाज इन्हें मुफ्त में मिल गया।

क्या इस कार्ड का लाभ लोगों को मिल पा रहा है?
गांव में सिर्फ 30% लोगों को इस कार्ड का फायदा मिल पाया है। उनमें से ही एक हैं देवेंद्र तिवारी। वो बताते हैं, “मैंने 2 साल पहले कार्ड बनवाया था। कुछ महीनों पहले मेरी पत्नी के पेट में पथरी थी। ऑपरेशन की जरूरत हुई। तब हमने उसे हरदोई के रानी कटियारी अस्पताल में भर्ती कराया। वहां हमसे इलाज के लिए एक भी पैसा नहीं लिया गया था। साथ ही मरीज की छुट्टी होने पर अस्पताल ने एक हफ्ते की दवा भी मुफ्त में दी थी।”

गांव के 70% लोगों को कार्ड का लाभ नहीं
गांव के 70% लोगों को इस कार्ड से फायदा नहीं मिल पाया। यहां के अंसार अहमद बताते हैं कि उनकी पत्नी का बच्चेदानी का ऑपरेशन होना था। इलाज के लिए मल्लावां के सरकारी अस्पताल में गए। वहां आयुष्मान कार्ड तो मान्य था पर इलाज के लिए संसाधन ही नहीं थे। दूसरे अस्पतालों में भी यही हाल था। इसलिए मजबूरन हमें पैसे देकर बाहर के अस्पताल में ऑपरेशन करवाना पड़ा।

कार्ड होने के बावजूद पैसा देकर करवाना पड़ा इलाज
हम अंसार से बात कर रहे थे कि पास में बैठे इरशाद बोल पड़े, “कार्ड का कोई फायदा वायदा नहीं होता है। 2 साल पहले मेरा बेटा ICU में एडमिट था। उसको खून में इन्फेक्शन हो गया था। इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड दिखाने पर अस्पताल वालों ने कहा कि इससे कार्ड से कोई मतलब नहीं है, अगर इलाज करवाना है तो नगद पैसे जमा कराने पड़ेंगे। जैसे-तैसे 4 लाख रुपए का इंतजाम करके अपने बेटे का इलाज करवाया।”

हां वह ये बात जरूर मानते हैं कि मल्लावां के सरकारी अस्पतालों में इलाज करवाने पर एक भी रुपए नहीं लिए जाते। लेकिन इसके लिए आयुष्मान कार्ड की कोई जरूरत नहीं पड़ती। जब बिना कार्ड के ही इलाज फ्री में हो जाता है तो इसकी जरूरत ही क्या है?

  • इस बात का जवाब जानने के लिए चलते हैं तीसरे सवाल पर…

सरकारी अस्पतालों में इलाज पहले ही फ्री था, तो कार्ड की क्या जरूरत?

CHC के डॉक्टर अरविंद बताते हैं कि ज्यादातर मरीज रात में एडमिट नहीं होते। अपने घर चले जाते हैं। एडमिट होने की स्थिति में ही आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल होता है।

CHC के डॉक्टर अरविंद बताते हैं कि ज्यादातर मरीज रात में एडमिट नहीं होते। अपने घर चले जाते हैं। एडमिट होने की स्थिति में ही आयुष्मान कार्ड का इस्तेमाल होता है।

मल्लावां CHC के डॉ. अरविंद मिश्रा कहते हैं, “बिल्कुल फायदा है, आयुष्मान कार्ड बनवाने का। जब भी मरीज को किसी ऐसी जांच की जरूरत है जो छोटे अस्पतालों में ना हो पाए वो यहां मुफ्त में कराई जा सकती है। साथ ही जरूरत की दवाएं अगर अस्पताल में हैं तब तो वो कार्ड के बिना भी मुफ्त में मिलती हैं लेकिन जब दवा और इंजेक्शन बाहर से मंगाने पड़ते तो आयुष्मान योजना के तहत लाभार्थियों को फ्री में दिए जा सकते हैं।”

सरकारी के साथ-साथ प्राइवेट अस्पताल भी आयुष्मान योजना ले सकते हैं। इसलिए सरकारी अस्पतालों के बाद हमने मल्लावां के प्राइवेट अस्पतालों की कुंडली खंगाली। इसमें एक चौंकाने वाली बात सामने आई…

एक भी प्राइवेट अस्पताल में आयुष्मान योजना की सुविधा नहीं

ये मल्लावां का CHC है। यहां आयुष्मान योजना का लाभ मिलता है, पर संसाधन नहीं हैं। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इस योजना का लाभ नहीं मिलता।

ये मल्लावां का CHC है। यहां आयुष्मान योजना का लाभ मिलता है, पर संसाधन नहीं हैं। वहीं प्राइवेट अस्पतालों में इस योजना का लाभ नहीं मिलता।

मल्लावां में 10 प्राइवेट अस्पताल हैं जहां डिलीवरी, सीजर और मेजर ऑपरेशन की सुविधाएं मिल जाती हैं। लेकिन एक भी अस्पताल ने आयुष्मान योजना नहीं ले रखी है। दरअसल, ये अस्पताल योजना ले ही नहीं सकते। इनमें से एक भी अस्पताल सरकार की तरफ से रजिस्टर्ड ही नहीं है। बिना सरकार से परमिशन लिए मल्लावां के सारे प्राइवेट अस्पताल गैर कानूनी ढंग से चलाए जा रहे हैं।

दरअसल इन सभी समस्याओं के चलते ही इस योजना का लाभ जरूरतमंद लोगों को मिल ही नहीं पा रहा।

पैसे वाले लोग कार्ड बनवाकर उठा रहे फायदा

2011 जनगणना के आधार पर BPL में शामिल लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया जाता है। इससे कई स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ वो फ्री में उठा सकते हैं।

2011 जनगणना के आधार पर BPL में शामिल लोगों का आयुष्मान कार्ड बनाया जाता है। इससे कई स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ वो फ्री में उठा सकते हैं।

मल्लावां चौराहे के पास चाय की टपरी पर अपनी चार पहिया गाड़ी से बढ़िया सूट-बूट पहने एक आदमी उतरा। उसने बताया कि उसकी मां का तो आयुष्मान कार्ड बना हुआ है, लेकिन उसका नहीं। वह बताता है, “मैं कई बार कार्ड बनवाने गया लेकिन कोई ना कोई बहाना करके मुझे वापस लौटा दिया जाता है।”

दरअसल, ऐसा इसलिए होता है क्योंकि ये योजना BPL यानी गरीबी रेखा से नीचे वालों के लिए है। आसान शब्दों में कहें तो गरीबों के लिए है। अब चार पहिया से उतरा कोई इंसान गरीब तो नहीं होगा। साथ ही उसकी शादी नहीं हुई थी। आयुष्मान योजना के नियमों के हिसाब से अगर आप लाभार्थी हैं तो शादी के बाद ही आप कार्ड बनवा सकते हैं। उससे पहले अगर मां का कार्ड बना है तो उसका लाभ आपको भी मिलेगा।

इनका तो कार्ड नहीं बना लेकिन गांव में कई ऐसे लोग हैं जो जरूरतमंद नहीं हैं लेकिन 2011 की जनगणना के आधार पर वो कार्ड बनवा लेते हैं। ऐसे में जरूरतमंद लोगों तक इस योजना का लाभ नहीं पहुंच पाता है।

सहयोग: कमलेश कुमार प्रजापति (रिपोर्टर)

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