पेलेन्थ्रोपोलॉजी रिसर्च सेंटर रूस: क्या दुनिया की सबसे पुरानी जनजाति है कोरकू? इस सवाल का जवाब खोजने मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र के जंगलों में जाएंगे रूस के वैज्ञानिक

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सागर10 मिनट पहलेलेखक: संदीप तिवारी

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अभी तक दावा किया जाता है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली काेरकू जनजाति दुनिया की सबसे प्राचीन जनजाति है।

अभी तक दावा किया जाता है कि मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में पाई जाने वाली काेरकू जनजाति दुनिया की सबसे प्राचीन जनजाति है। इस तथ्य की पुष्टि के लिए रूस का पेलेन्थ्रोपोलॉजी (जीवाश्म विज्ञान) रिसर्च सेंटर सागर और पुणे के यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर शोध करेगा। डॉ. हरीसिंह गौर यूनिवर्सिटी के मानव विज्ञान विभाग (एंथ्रोपोलॉजी) के विद्यार्थी व शिक्षक रूस के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों के साथ मिलकर शोध करेंगे।

रूस के पेलेन्थ्रोपोलॉजी रिसर्च सेंटर के साथ यूनिवर्सिटी के एंथ्रोपोलॉजी विभाग का एमओयू साइन हुआ है। शोध के दौरान एशिया के लोगों की विविधता को लेकर विभिन्न पैरामीटर पर डेटा कलेक्ट होगा और जनसंख्या पर शोध किया जाएगा। जेनेटिक सीक्वेंसिंग के आधार पर देखा जाएगा कि कोरकू जनजाति कितनी पुरानी है। फिलहाल यह तय नहीं है कि शोध कब तक चलेगा।

इस प्रोजेक्ट के तहत देशभर से डेटा कलेक्शन के बाद उसका टेबुलेशन, परीक्षण, परिणामों पर काम चलेगा। कुछ काम सागर विश्वविद्यालय में होगा तो कुछ पुणे के विश्वविद्यालय में और कुछ काम रूस के पेलेन्थ्रोपोलॉजी रिसर्च सेंटर में होगा। ऐसे में यही कहा जा रहा है कि यह प्रोजेक्ट काफी लंबा चलेगा। बता दें कि कोरकू का शाब्दिक अर्थ है मानव समूह। इनके बीच कोरकू भाषा ही बोली जाती है। यह दुनिया की सबसे प्राचीन जनजाति मानी जाती है।

मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र में है काेरकू जनजाति

कोरकू जनजाति मध्य प्रदेश में सतपुड़ा पर्वत माला के जंगलों से लगे छिंदवाड़ा के मवासी, बैतूल जिले की भैंसदेही और चिचोली तहसील, हरदा जिले की टिमरनी और खिरकिया, खंडवा जिले की खालवा, देवास जिले की बागली और उदयनगर तहसील के अलावा सीहोर जिले के दक्षिणी हिस्से में निवास करती है। महाराष्ट्र में अकोला, मेलघाट तथा मोर्शी तहसीलों में भी रहते हैं। 1991 की जनगणना के आधार पर कोरकुओं की कुल जनसंख्या 4,52,149 थी। कोरकू मुण्डा या कोलारियन जनजातीय समूह में आते हैं।

इन बिंदुओं पर शोध होगा
1. इस जनजाति की उत्पत्ति संबंधी मामलों पर शोध होगा।
2. यूरेशिया (एशिया और रूस) की जनजातियों से तुलनात्मक अध्ययन।
3. मानव अनुवांशिकी विकास और बायोलॉजिकल विकास का अध्ययन।
4. जनजातीय संस्कृति, सामाजिक संबंध, लोक साहित्य, धार्मिक मान्यताएं भी इस शोध में शामिल की जाएंगी।
5. प्राचीन और वर्तमान जनजातीय जनसंख्या का तुलनात्मक अध्ययन।

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