देवेंद्र फडणवीस का अजित पवार को लेटर: लिखा- नवाब को महागठबंधन में शामिल न करें, दाऊद से रिश्तों के आरोप को वजह बताया

मुंबई33 मिनट पहले

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डिप्टी CM देवेंद्र फड़णवीस ने डिप्टी CM अजित पवार से नवाब मलिक को अलायंस में शामिल न करने की मांग की। - Dainik Bhaskar

डिप्टी CM देवेंद्र फड़णवीस ने डिप्टी CM अजित पवार से नवाब मलिक को अलायंस में शामिल न करने की मांग की।

NCP नेता नवाब मलिक के अजित गुट में शामिल होने के कयास के बीच महाराष्ट्र के डिप्टी CM देवेंद्र फडणवीस ने दूसरे डिप्टी CM अजित पवार को लेटर लिखा है। लेटर में उन्होंने लिखा कि नवाब मलिक को गठबंधन में शामिल नहीं करना चाहिए। इसकी वजह उन्होंने नवाब मलिक पर दाऊद से कनेक्शन का आरोप बताया है।

लेटर में फडणवीस ने लिखा- मैं जानता हूं कि आपकी पार्टी में कौन शामिल होगा, कौन नहीं होगा, इसका फैसला आप करेंगे। लेकिन मुझे लगता है कि नवाब मलिका का आपकी पार्टी से जुड़ना अलायंस को नुकसान पहुंचा सकता है। महा विकास अघाड़ी (MVP) सरकार में नवाब मलिक मंत्री थे। गिरफ्तार होने के बावजूद वह मंत्री बने रहे थे। लेकिन हमारा अलायंस MVP की तरह नहीं है।

विधानसभा में सत्ता पक्ष की ओर नवाब मलिक बैठे थे
गुरुवार (7 दिसंबर) को नवाब मलिक महाराष्ट्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र में शामिल हुए और सत्ता पक्ष की तरफ बैठे गए।। इसके बाद कयास लगाए गए कि नवाब मलिक अजित गुट में शामिल होने जा रहे हैं। इसे लेकर शिवसेना (उद्धव गुट) के नेता अंबादास दानवे और सुषमा अंधारे ने मलिक पर हमला किया था। उन्होंने कहा- मलिक ने खुद तय नहीं किया कि वह बागी हैं या शरद पवार गुट से जुड़े हैं।

मलिक को 23 फरवरी 2022 को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में गिरफ्तार किया था। मलिक पर आरोप है कि उन्होंने कुर्ला में गोवावाला कंपाउंड की एक जमीन के लिए कथित तौर पर भगोड़े घोषित अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम और उसके साथियों से पैसों का लेनदेन किया। 11 अगस्त 2023 को सेहत खराब होने की वजह से सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत दी थी। वे 18 महीने तक जेल में रहे। इसके बाद पहली बार मलिक आज 7 दिसंबर को विधानसभा पहुंचे।

नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद उनके ऑफिस के ऑफिशियल एक्स हैंडल (पहले ट्विटर) से यह तस्वीर पोस्ट की गई।

नवाब मलिक की गिरफ्तारी के बाद उनके ऑफिस के ऑफिशियल एक्स हैंडल (पहले ट्विटर) से यह तस्वीर पोस्ट की गई।

डिप्टी CM फडणवीस ने खुलासा किया था
9 नवंबर 2021 को महाराष्ट्र के पूर्व CM देवेंद्र फडणवीस ने नवाब मलिक के अंडरवर्ल्ड से रिश्ते का सनसनीखेज खुलासा किया था। उन्होंने कहा था कि नवाब मलिक ने दाऊद इब्राहिम के गैंग से जमीनें खरीदीं। ये जमीनें मुंबई में ब्लास्ट करने के आरोपियों की हैं। पूर्व CM ने आरोप लगाया कि सरदार शाह वली खान और हसीना पारकर के करीबी सलीम पटेल के नवाब मलिक के साथ व्यवसायिक संबंध हैं। इन दोनों ने नवाब मलिक के रिश्तेदार की एक कंपनी (Solidus company) को मुंबई के LBS रोड पर मौजूद करोड़ों की जमीन कौड़ियों के दाम में बेची।

फडणवीस के मुताबिक जमीन की बिक्री सरदार शाह वली खान और सलीम पटेल ने की थी। नवाब मलिक भी इस कंपनी से कुछ समय के लिए जुड़े हुए थे। कुर्ला के LBS रोड पर मौजूद 3 एकड़ जमीन सिर्फ 20-30 लाख में बेची गई, जबकि इसका मार्केट प्राइस 3.50 करोड़ से ज्यादा था। पूर्व CM ने इसके सभी सबूत सेंट्रल एजेंसीज को देने की बात भी कही थी। माना जा रहा है कि इसी मामले में कार्रवाई करते हुए ED की टीम ने मलिक को पूछताछ के लिए उठाया है। हालांकि ED की ओर से इस पर अभी कोई बयान जारी नहीं किया गया है।

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अजित बोले- शरद पवार कहते कुछ, करते कुछ हैं:मुझसे सत्ता में जाने को कहा, खुद NCP अध्यक्ष पद छोड़ा; सुप्रिया सब जानती थीं

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और NCP नेता अजित पवार ने कहा कि शरद पवार खुद ही NCP अध्यक्ष पद से इस्तीफा देना चाहते थे। लेकिन वे हमसे कहते कुछ और थे, करते कुछ और थे।

अजित ने यह बात शुक्रवार (1 दिसंबर को) रायगढ़ के कर्जत में हुए NCP अधिवेशन में कही। वे बोले कि शरद ने लगातार अपनी भूमिका बदली। इस घटनाक्रम की सारी जानकारी सुप्रिया सुले को थी। अजित ने यह भी बताया कि शरद पवार ने ही उनसे सत्ता में भागीदारी के लिए कहा था। पूरी खबर पढ़ें…

इलेक्शन कमीशन NCP सिंबल पर सुनवाई करेगा:शरद पवार बोले- चिह्न चला भी जाए तो चिंता नहीं; भाजपा वॉशिंग मशीन को सिंबल बनाए

इलेक्शन कमीशन कल यानी 6 अक्टूबर को NCP के इलेक्शन सिंबल के अधिकार पर सुनवाई करेगा। कमीशन ने शरद और अजित दोनों गुटों को पर्सनल सुनवाई के लिए बुलाया है। ये दोनों ही गुट पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं।

उधर, शरद पवार ने दिल्ली में पार्टी की वर्किंग कमेटी की मीटिंग में कहा कि NCP का चुनाव चिन्ह बदलने की कोशिश हो सकती है। अगर पार्टी का चुनाव चिन्ह चला भी जाए तो कार्यकर्ताओं को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। सिंबल बदलने से लोग नहीं बदलते हैं। उन्हें पता होता है कि कौन सा बटन दबाना है। मैंने अलग-अलग चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़े और जीते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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